It has always been heard by everyone that there is God in every particle. Buddha has also said that our life is as we think. Today, these two thoughts knocked my brain together, when I saw this unique sky today.
It seems to me that just like parents play with the child, and give the child everything one likes. This is how all the universe plays with me. I feel that life is a magical toy, which God has placed in my hands. Just like all the universe is coming and sharing with me every color. At every level, what is the action of the same incident and what is the reaction of that, is giving me experience about the policy of all.
When I had gone for hiking in the morning, the beautiful colors of this sky started playing with me. I got so intoxicated today that I started dancing on a small hill. I was dancing, but with that, my existence became colorful like these colors and sat in a corner of life too. My inner silent sky was shining in the aura of the colors of the outside sky.
I was dancing and seeing the existence of myself lost in my own color. So suddenly I realized that my dancing existence, sitting in my own silence, entered into existence.
I feel that I am sitting on a small hill, and I am flying.
Today, it was such a unique experience for me to be one of the sky that I do not know What to do and What to say. Just as my life is getting lighter, the weight of this lightness feels very much. Released from this heaviness, it produces words. When these shape my experiences into words, I feel lightheaded.
After this, these words travel towards the world and I move from this moment and move towards the next moment.
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मेरे को ऐसे लगता है कि बस जैसे माँ-बाप बच्चे के साथ खेलतें हैं, और बच्चे को उस की पसंद की हर चीज़ ले के देतें हैं। ऐसे ही तमाम ब्रह्माण्ड मेरे साथ खेलता है। मेरे को ऐसे लगता है कि ज़िंदगी एक जादूमई खिलौना है, जो खुदा ने मेरे हाथों में थमा दिया। जैसे सब ब्रह्माण्ड बस आपने हर रंग-रूप आकर मेरे साथ सांझा कर रहा है। मेरे को हर लेवल पर एक ही घटना का क्या एक्शन है और उस का क्या रिएक्शन है, सब की निति के बारे में अनुभव देता जा रहा है।
जब मैं हिक्किंग केलिए सुबह गई हुये थी तो इस आसमान के सूंदर रंगों ने मेरे साथ खेलना शुरू किया। मेरी तो आज ऐसी मदहोशी आ गई कि मैंने छोटी सी पहाड़ी पर ही नाचना शुरू किया। नाच रही थी, पर उस के साथ ही मेरा वजूद इन रंगों की तरह रंगीला बन कर ज़िंदगी की एक कार्नर में भी बैठा गया। आसमान के रंगों की आभा में मेरी चुप का आसमान चमक रहा था।
तब मैंने आसमान पर छाई हुये रंगों की आभा को देखा तो जब आसमान के रंगों के साथ मैं में घुल गई तो मैं भी रंग बन गई। पर मेरे रंग में एक्शन था। मेरा रंग पिंक-ऑरेंज था और यह रंग ,जो एक्शन ले रहा था, यह मेरी चेतना थी, और चेतना का एक्शन उड़ना था, जो आसमान की रंगीली आभा में उड़ने लगा।
मैं महसूस कर रही हूँ कि मैं नीचे छोटी ही पहाड़ी पर भी बैठी हूँ, और उड़ भी रही हूँ।
आज मेरा और आसमान का एक होना ऐसा निराला अनुभव था कि मेरे को पता ही नहीं चलता कि मैं क्या करूँ और क्या कहूँ ? बस मेरा यह जीवन जितना हल्का होता जा रहा है, इस हल्केपन का भार बहुत ज़्यादा महसूस होता है। इस भारीपन से रिहाई यह लफ्ज़ दिलवाते हैं। जब यह मेरे अनुभवों को लफ़्ज़ों का आकार देतें हैं, तो मेरे में हल्कापन आता है।
इस के बाद यह लफ्ज़ संसार की ओर यात्रा करतें हैं और मैं इस पल में से निकल कर आगे के पल की और बढ़ जाती हूँ।